Dropdown Menu

May 28, 2014

Sinapis Nigra: Short Notes On Hay Fever

An important notes about use of Sinapis Nigra in cases of Hay Fever was published in "The Homoeopathic Recorder, Vol. XXV, No. 3, February, 1910".


Sinapis Nigra for the All Bunged Up Condition.
Dr. H. M. Bunting, of Norris town, read a model little paper
on  “Some Clinical Experience with Sinapis Nigra”

Here is the gist of it :

“Given a condition of acute coryza, with sneezing, lachrymation,
itching, smarting, soreness and pressure of eyeballs, dryness
of nostrils with stoppage, especially of left, and a scanty thin
acrid discharge, with hot, dry feeling in the pharynx, hacking
cough, and rawness in the throat with desire to clear it, hoarseness,
a tired feeling all over, lassitude, and general
done up feeling. I know of no more efficient remedy than Sinapis Nigra.”


“For two years it has met a condition of beginning cold in
cases where Aconite, Capsicum, Cepa, Gelsemium, Nux Vomica
and other remedies closely allied in their symptomatology failed to
relieve, and in failing the catarrhal condition would extend to the
mucosa of the larynx and bronchi, with the condition designated
by my patients as the ‘Cold has gone down and settled on my
chest.’ ”

“In the period before mentioned. I have repeatedly checked
what would, in my experience, have otherwise resulted in a cold
and cough which, in many instances, would have taken many
weeks to cure.”

“I have relieved and cured more cases with this remedy, where
the symptoms above indicated were complained of together with
heat and fullness of the head, general tired feeling all over, and
the complete and very common picture of a beginning coryza,
than with any three other remedies.”

“I believe it to have a sphere of action closely allied to Aconite,
Capsicum, Gelsemium and Nux vomica, but it will be found to
benefit cases where we have fallen into the too common habit of
administering these or other better known remedies.”

May 5, 2014

होम्योपैथीः बहुत से रोग एक ही दवा



© Dr Ravinder S Mann 2014



होम्योपैथी के बहुत से फायदों में से एक सबसे महत्वपूर्ण ये है कि आप बहुत से अलग- अलग रोगों के लिये कम से कम या फिर सिर्फ एक ही दवा से ठीक हो सकते हैं. ये दावा आश्चर्यजनक या भ्रमाने वाला लग सकता है लेकिन यह तथ्यों पर आधारित है. इस दावे को थोङा खुलकर और कुछ मरीजों के वास्तविक केसों से समझते हैं.







40  वर्ष का यह रोगी मस्सों (Warts) के लिये दवा लेने आया जिनसे वह 5 वर्षों से पीङित था. लेकिन साथ ही वह बुरी तरह से  अवसाद (Depression and Anxiety) व अनिद्रा (Insomnia)से भी पीङित है और पिछले  8 वर्षों से अवसाद व नींद के लिये दवायें (Antidepressant and Sedatives) ले रहा था लेकिन इसके बावजूद उसके विभिन्न लक्षण रोजमर्रा के  जीवन में बाधा बन रहे थे उन सब दवाओं के बावजूद वह जीवन को आनंददायक ढंग से और पूर्णतया स्वस्थ होकर नहीं जी पा रहा था. और जैसा कि होम्योपैथी मानती है मानसिक रोग धीरे- धीरे शारीरिक रोगों को भी जन्म देते हैं यानि रोगों की उत्पत्ति मानसिक आयाम से शारीरिक आयाम की तरफ होती है

(Pshyco-somatic origin of diseases). यह रोगी 8 वर्षों से अवसाद से पीङित था और फिर 5 वर्ष पहले मस्से बनने लगे. किसी भी प्रकार के ईलाज ने उसके रोग और लक्षणों को राहत नहीं पहुँचाई.


यह रोगी एक Antacid, एक  Antidepressant, एक  Sedative और एक Antihypertensive रोज ले रहा था. और इसके बावजूद बीमारियों का ठीक होना तो दूर फौरी तौर पर लक्षणों को राहत भी नहीं थी. लेकिन होम्योपैथी ईलाज में आने के बाद उसके सभी लक्षणों को आधार बनाकर सिर्फ एक ही दवा (Aurum Met) दी गयी और रोगी के मस्से, अवसाद, अनिद्रा सभी ठीक हो गये. जिनके लिये ना तो अलग- अलग दवायें लेनी पङीं और ना ही 8 वर्ष तक या 5 वर्ष तक लगातार ईलाज लेने की जरूरत पङी.    






35 वर्षीय महिला 10 वर्षों से सिरदर्द से पीङित है. सिरदर्द ज्यादातर सिर के एक तरफ होते हैं जिन्हें माइग्रेन के रुप में डायग्नोस किया जाता है. लेकिन साथ ही यही महिला हाईपोथायरोडिज्म यानि थायराईड ग्रंथि द्वारा हार्मोन्स के कम स्रावण से पीङित है. साथ ही यूरिक एसिड का स्तर भी रक्त में सामान्य से अधिक है. उदासी, अनिद्रा, चिङचिङापन, क्रोधी स्वभाव भी रोजमर्रा के जीवन को प्रभावित कर रहा है. रोगिणी सिरदर्द के लिये दर्द निवारक गोलियाँ, थायराईड के लिये दवाई, यूरिक एसिड को कम करने के लिये दवाई ले रही है. अब अगर वह नींद, उदासी व क्रोध के लिये भी किसी चिकित्सक की राय ले तो इनके लिये भी अलग से दवायें लेनी होंगी.



लेकिन यही रोगी जब होम्योपैथी दवा लेना चाहता है तो इन सभी रोगों और लक्षणों के लिये सिर्फ एक ही होम्योपैथी दवा (Sepia) से ठीक हो जाता है.एक ही दवा सिरदर्द के साथ- साथ यूरिक एसिड के स्तर को भी ठीक करती है और थायराईड ग्रन्थी के काम में सुधार लाती है.



और यह होम्योपैथिक ईलाज भी हमेशा नहीं लेना पङता, बल्कि  कुछ सप्ताह या कुछ महीनों में ही इन वर्षों पुराने रोगों से छुटकारा पाया जा सकता है.




अब सवाल ये है कि ऐसा कैसे सम्भव है कि आप इतने अलग- अलग रोगों से पीङित हों और जिनके लिये आप अलग- अलग चिकित्सकों से ईलाज ले रहे हों, उन विभिन्न रोगों को कुछ या एक ही दवा से ठीक किया जा सके?



होम्योपैथी सभी बीमारियों को सायको-सोमैटिक स्तर से उत्प्न्न हुआ मानती है. दूसरा, होम्योपैथी की अवधारणा यह है कि किसी भी रोगी के अलग- अलग तंत्रों (Systems) में होने वाले विभिन्न रोग अलग- अलग लक्षणों के बावजूद मूल रुप से आपस में सम्बन्धित हैं. और किसी भी रोगी के सभी रोगों को एक ही ईकाई के रूप में देखा जाना चाहिये. यानि होम्योपैथी का रोगों के बारे में बुनियादी नजरिया अन्य चिकित्सा प्रणालियों से अलग है. होम्योपैथी की चिकित्सा के बारे में मूल अवधारणा यह है कि किसी भी रोगी के विभिन्न रोगों का ईलाज करने के बजाय उस रोगी का ईलाज किया जाये जिसे विभिन्न रोग हैं.



दूसरी ओर, होम्योपैथिक दवाओं के लक्षणों को जानने के लिये जानवरों पर नहीं बल्कि स्वस्थ मनुष्यों पर ही उनके प्रयोग किये गये हैं. इसके पीछे मूल अवधारणा और तर्क यह है कि जब दवाओं का प्रयोग मनुष्यों पर होना है तो हमें दवाओं के मनुष्यों पर प्रभाव की ठीक- ठीक जानकारी होनी चाहिये. यह ध्यान रहे कि दवायें मनुष्यों व अन्य जानवरों पर अलग- अलग प्रभाव डालती हैं. किसी दवा के, किसी जानवर पर होने वाले प्रभावों को आधार बनाकर, मनुष्यों पर उस दवा का इस्तेमाल नहीं होना चाहिये.



जब इन दवाओं का मनुष्यों पर शोध किया गया तो यह पाया गया कि प्रत्येक होम्योपैथिक दवा एक से ज्यादा तंत्रों को प्रभावित करती है और विभिन्न लक्षणों को पैदा करती है. इन सभी लक्षणों को एकत्रित किया गया और सूचीबद्ध किया गया.



अब किसी भी रोगी को वही होम्योपैथिक दवा दी जाती है जो उसके सभी लक्षणों से मेल खाती है. यानि एक रोगी जिसे सिरदर्द के साथ अनिद्रा, अवसाद के साथ भय, निराशा के साथ आत्महत्या करने के विचार आते हों उसे ठीक वही होम्योपैथिक दवा दी जायेगी जो स्वस्थ व्यक्तियों में शोध करते समय ठीक यही लक्षण प्रकट करती हो. इसलिये होम्योपैथिक ईलाज लेने में सबसे महत्त्वपूर्ण यह है कि यदि आप बहुत से अलग- अलग रोगों से पीङित हैं तो जरूरी नहीं कि आप अलग- अलग चिकित्सकों से ईलाज लें और बहुत सी दवायें खायें. आप होम्योपैथी चिकित्सा लें और आपका होम्योपैथ आपके सभी रोगों को ध्यान में रखकर एक ही प्रेसक्रिप्शन देगा और यही दवा आपके सभी रोगों का निदान भी करेगी.  



May 2, 2014

A Case of Anxiety

A Case of Anxiety

© Dr Ravinder S Mann 2014


A 19 yrs old boy from Ranikhet presented on November 11,2013 with symptoms of depressive mood disorder, after a loss in college body elections. Patient is a college student and attempted to face an election for college student’s body but failed 3 months back. Now he is unable to face colleagues and other people around him. He said he was defeated in an unjustified manner and manipulated against him. Feel insulted. Want not to meet anyone and to seek aloneness he gone somewhere from home for a time. Very anxious and desperate. Brooding. He said he thinks about his election all the time. Very hurried and anxious. Spells of anger and irritability with family members. Sad, gloomy, ill tempered over trifles, fretful. Sometimes want to weep. Unable to make right decisions, even he says I feel I am unable to decide anything, want of confidence. Wavering in decisions constantly, sometimes want to do this and at other time want to do opposite. Forgetful and unable to concentrate.

Perspiring profusely, on walking. Palpitations. Sweating on head, face and cervical regions is visible. Has painful eruptions on head. Warts on face, cervical region, back with itching.

Desire to eat salt very much. Thirst, sleep and other systems are not detected any abnormality.    

Patient has lost his father at younger age.

Rubrics selected:

31 rubrics are selected.

MIND - AILMENTS FROM - indignation
MIND - ANGER - easily
MIND - ANXIETY
MIND - ANXIETY - hurry, with
MIND - BROODING
MIND - COMPANY - aversion to
MIND - CONCENTRATION - difficult
MIND - DESPAIR
MIND - DISCONTENTED
MIND - DWELLS - past disagreeable occurrences, on
MIND - HURRY
MIND - IRRITABILITY
MIND - MOROSE
MIND - THOUGHTS - persistent
MIND - WEEPING
MIND - WEEPING - desire to weep
HEAD - ERUPTIONS - painful
HEAD - HAIR - falling
FACE - WARTS
CHEST - PALPITATION of heart
BACK - WARTS - Cervical region
SKIN - WARTS
SKIN - WARTS - itching
GENERALS - FOOD and DRINKS - salt - desire
MIND - CONFIDENCE - want of self-confidence
MIND - FORGETFUL
MIND - IRRESOLUTION
HEAD - PERSPIRATION of scalp - Forehead
FACE - PERSPIRATION
PERSPIRATION - PROFUSE
PERSPIRATION - WALKING – while


Repertorization Chart









Prescription on November 11, 2013

Natrum Mur  1M 3 doses prescribed to take with interval of 30 minutes.
Sac lac prescribed for a 3 weeks.

December 9, 2013

Patient reported with relaxed and eased clinical features. His thoughts about his failure in elections are vanished. Feel happy and calm. No constant thoughts of painful experiences.
Earlier he felt he was in hurry all the time but now patient is relaxed and able to concentrate on his different tasks. All the painful eruptions on head healed. But yet he feels very low and lack of self-esteem.

Many acute clinical features are subsided but yet many of the symptoms are remaining. New repertorization chart is prepared by deleting few rubrics from last repertorization chart. Rubrics which are deleted, based on symptoms that are subsided now. 25 rubrics selected now.

MIND - AILMENTS FROM - indignation
MIND - ANGER - easily
MIND - ANXIETY
MIND - BROODING
MIND - COMPANY - aversion to
MIND - CONCENTRATION - difficult
MIND - DESPAIR
MIND - DISCONTENTED
MIND - IRRITABILITY
MIND - WEEPING
MIND - WEEPING - desire to weep
HEAD - HAIR - falling
FACE - WARTS
CHEST - PALPITATION of heart
BACK - WARTS - Cervical region
SKIN - WARTS
SKIN - WARTS - itching
GENERALS - FOOD and DRINKS - salt - desire
MIND - CONFIDENCE - want of self-confidence
MIND - FORGETFUL
MIND - IRRESOLUTION
HEAD - PERSPIRATION of scalp - Forehead
FACE - PERSPIRATION
PERSPIRATION - PROFUSE
PERSPIRATION - WALKING - while

Following 6 Rubrics are deleted from first chart  :-

MIND - ANXIETY - hurry, with
MIND - MOROSE
MIND - DWELLS - past disagreeable occurrences, on
MIND - HURRY
MIND - THOUGHTS - persistent
HEAD - ERUPTIONS - painful

Repertorization chart 





Prescription on December 9, 2013

Many acute symptoms of anxiety are subsided but patient’s basic trait of low level of self confidence and low self esteem which always dominate his personality needs to e address now.

Thuja Occidentalis  1M 3 doses prescribed to take with interval of 30 minutes.

Sac Lac prescribed for 3 weeks.

January 6, 2014

Patient reported with much more reduction in anxiety. Now he feels very less mental stress. His low self-esteem is a bit improved. Warts start to reduce. But sometimes again remembers his defeat in elections and then become anxious for a little time. Forgetfulness a bit increased. Acute symptoms seems to be increased a bit again.

Prescription on January 6, 2014

Natrum Mur 1M 3 doses prescribed to take with interval of 30 minutes. 
Sac Lac prescribed for 3 weeks.

February 4, 2014

Warts improved a lot much but yet present. Acute symptoms of anxiety are reduced but still present. Forgetfulness same. Patient seems stuck on the path of recovery. Many symptoms seems a bit improved.

Prescription on February 4, 2014

Sac Lac prescribed for next 3 weeks. No medicine was given.

March 5, 2014

Patient consulted with much worse symptoms. Eruptions on scalp with pain and itching.
Poor concentration. Anything bad happened in day remains persistent in thoughts for a long time. Warts again increasing in size.

Repertorization Chart

Same repertorization chart is used without any changes. Natrum Mur and Thuja both helped the case but partially. Both medicines were partial similar to case.

Prescription on March 5, 2014

Calc Carb  1M      3 doses prescribed to take with interval of 30 minutes. 
Sac Lac prescribed for 3 weeks.


April 25, 2014

All the symptoms of stress, anxiety, sadness, irritability, hurried nature, poor concentration,
weeping mood, hopelessness, brooding cured. Patient is happy and charming. Patient has confidence to make right decisions without wavering. Hairs falling come under normal range. Many warts are vanished. A fade mark of few warts is remained behind.

Prescription on April 25, 2014

Sac Lac is prescribed for 2 weeks and advised to discontinue the medicine after that.