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Mar 28, 2012

होम्योपैथी : परिचय एवं तथ्य


1. होम्योपैथी की खोज जर्मन चिकित्सक डा सेमुअल हैनिमैन ने 1796 में की. होम्योपैथी मूलतः इस सिद्धांत पर आधारित है कि दवायें मानव शरीर में जो लक्षण पैदा करती हैं, उन्ही लक्षणों को ठीक करने की क्षमता भी रखती हैं.

2.होम्योपैथिक दवाएँ पेड़, पौधों, जीवों, रासायनिक पदार्थों, विभिन्न विषों, विभिन्न प्राकर्तिक उत्सर्जनों एवं रोग उत्पादों से निर्मित होती हैं. वह प्रत्येक पदार्थ जो मनुष्य शरीर में रोग पैदा करने की क्षमता रखता है, वह दवा के रूप में भी कार्य कर सकता है.

3. भारत में होम्योपैथिक दवाओं का बाज़ार, इस वर्ष 30% बढ़कर, 4,600 करोड़ रूपये सालाना हो जाने कि संभावना है. विश्व में इस वर्ष होम्योपैथी दवाओं की बिक्री बढ़कर 26,300 करोड़ रूपये होने की संभावना है. (Report by The Associated Chambers of Commerce and Industry  Of India- ASSOCHAM)
       एक अनुमान के अनुसार 2009-10 में भारत में 10 -12 करोड़ मरीजों ने होम्योपैथिक चिकित्सा का उपयोग किया, अगले 2 3 वर्षों में ये संख्या बढ़कर 16 करोड़ होने का अनुमान है.
       वर्तमान में भारत में 5 लाख रजिस्टर्ड होम्योपैथिक चिकित्सक हैं प्रतिवर्ष 20,000 नए होम्योपैथिक चिकित्सक, चिकित्सा क्षेत्र में जुड़ रहे हैं.

4. होम्योपैथिक दवाओं के प्रयोग सर्वप्रथम स्वस्थ मनुष्यों पर किये जाते हैं एवं उन दवाओं द्वारा उत्पन्न सभी लक्षणों को होम्योपैथिक मेटेरिया मेडिका में व्यवस्थित तरीके से नोट कर लिए जाता है, बाद में किसी भी रोगी के निरीक्षण के बाद उस दवा का प्रयोग किया जाता है जो उसके लक्षणों से सर्वाधिक मेल खाती है.

5. होम्योपैथी अन्य चिकित्सा विज्ञानों से, रोग एवं रोगी के प्रति अपने द्रष्टिकोण को लेकर पूर्णतया भिन्न है. जहां अन्य चिकित्सा पद्दतियां प्रत्येक रोग को ए़क प्रथक इकाई के रूप में मान्यता देती हैं वहीं होम्योपैथी रोग एवं रोगी दोनों को ए़क सम्मिलित्त इकाई के रूप में देखती है, एक उदाहरण से इसे समझना ज्यादा आसान होगा - 

   मान लीजिए एक रोगी सिरदर्द से पीड़ित है, होम्योपैथी में सिर्फ सिरदर्द के लिए 1150 से भी अधिक दवायें हैं, परन्तु सिर्फ वही दवा रोगी के लिए उपयुक्त होगी जो उसके व्यक्तिगत लक्षणों से पूर्णतया मेल खायेगी. हमें रोग के अन्य तथ्य भी देखने होंगे. रोगी को धूप में जाने पर सिर दर्द शुरू हो जाता है, अब दवायों की संख्या 74 रह जायेगी, मान लीजिए इसी रोगी को सिर दर्द के साथ ही जी मिचलाने लगता है अब दवाएँ सीमित हो कर 36 रह जायेंगी, अब यदि यही रोगी नमक एवं नमकीन चीजें बहुत अधिक खाता है तो दवाओं की संख्या और घटकर मात्र 11 रह जायेगी. इस रोगी के मानसिक एवं भावनात्मक लक्षणों को भी शामिल कर लिया जाये, जैसे यह रोगी टोकने या किसी काम के लिए मना करने पर क्रोधित हो जाता है, तो अब इस रोगी के लिए दवाओं की संख्या घटकर सिर्फ 4 रह जाती है, यदि यह रोगी सवालों के जबाव बहुत ही धीरे धीरे देता हो, उसे जबाव देने के लिए बहुत सोचना पड़ता हो और उसकी इस परिस्थिति का कारण देर रात तक काम करने की उसकी दिनचर्या हो तो आखिर में उसके लिए सिर्फ 1 ही दवा काकुलस इण्डिकस का चुनाव होगा...

इस केस से सम्बन्धित लक्षण देखें -

HEAD – PAIN (1150 Medicine)
HEAD - PAIN - sun, from exposure to
HEAD - PAIN - accompanied by - nausea
GENERALS - FOOD and DRINKS - salt - desire
MIND - ANGER - contradiction; from
MIND - ANSWERING - slowly
HEAD - PAIN - sleep - loss of; from

Cooculus Indicus

   इस उदाहरण से यह समझना बहुत आसान है कि होम्योपैथी, सिर्फ रोग ही नहीं बल्कि रोगी के अन्य सभी कारकों, तथ्यों, दिनचर्या, मानसिक व भावनात्मक झुकाव एवं खाने-पीने की आदतों तक को एक ही इकाई के रूप में सम्मिलित करती है.

6. मनुष्य का शरीर खरबों कोशिकाओं, ऊतकों, अंगों एवं तंत्रों से मिल कर बना है, और यह सभी भाग ए़क दूसरे से पूर्णतया भिन्न होते हुए भी आपसी तालमेल एवं ए़क इकाई के रूप में कार्य करते हैं. किसी भी ए़क अंग, ऊतक या तंत्र में आने वाली खराबी शरीर के अन्य अंगों, तंत्रों एवं कोशिकायों को भी प्रभावित करती है. होम्योपैथी इस सिद्धांत को बहुत ही गंभीरता से रोगी के इलाज में काम में लेती है.

7. होम्योपैथ के लिए आवश्यक है कि वह प्रत्येक रोगी के केस की जानकारियाँ बहुत ही विस्तार से एकत्रित करे.
       रोगी मुख्य तौर पर अपनी सबसे मुख्य शिकायत ही लेकर आता है, लेकिन उसके लक्षणों को आराम देने वाली एवं बढा देने वाली सभी परिस्थितियां बहुत ही महत्वपूर्ण होती हैं. जैसे सिरदर्द, धूप में जाने पर बढ़ जाना या सिर दबाने या चुन्नी कस कर बाँधने पर आराम मिलना.
       इसी प्रकार मुख्य लक्षणों के साथ होने वाले अन्य लक्षण भी बहुत महत्वपूर्ण होते हैं. जैसे सिरदर्द के साथ चक्कर आना या सिरदर्द के साथ पेट में जलन होना या सिरदर्द के साथ धुंधला दिखाई देना.
       इसी प्रकार मुख्य लक्षणों का किसी समय, मौसम या ऋतू के साथ जुड़ा होना भी बहुत ही महत्वपूर्ण होता है, जैसे सिरदर्द रोज सुबह शुरू होना या रोज शाम को कपड़े बदलते समय खुजली शुरू होना या आधी रात के बाद साँस लेने में दिक्कत होना आदि. कुछ परेशानियाँ मौसम एवं ऋतू से सम्बन्धित होती हैं जैसे हर बार मौसम बदलने पर खाँसी होना या बारिश के मौसम में जोड़ों में दर्द होना.
       रोगी के लक्षणों से सम्बन्धित भावनात्मक, मानसिक लक्षण भी सही दवा के चुनाव में बहुत महत्त्व रखते हैं. एक बच्चा जो बुखार से पीड़ित होने पर लगातार बोलता है या एसिडिटी से वर्षों से पीड़ित रोगी, जो पहले बहुत ही गुस्सैल स्वभाव का था, अब बिलकुल शांत और सज्जनता से पेश आता है, यह मानसिक बदलाव एक होम्योपैथ के लिए सही दवा का चुनाव करने में बहुत महत्वपूर्ण हैं.
       इसी प्रकार एक्जिमा से पीड़ित महिला जो अपने रोग के बारे में बात करते करते रोने लगती है, उसकी रो पड़ने की यह भावनात्मक घटना दवा के सही चुनाव में महत्वपूर्ण हो सकती है.
       इसी प्रकार खाने पीने की आदतें भी बहुत महत्वपूर्ण कारक हैं. खाने के स्वाद की पसंदगी, किसी खास चीज़ को खाने पर होने वाले लक्षण, किसी प्रकार के भोजन से आराम मिलने की स्थिति भी अन्य लक्षणों की तरह बहुत निर्णायक साबित हो सकती है.   

8. होम्योपैथी में ए़क ही दवा विभिन्न रोगों में समान रूप से काम में आ सकती है एवं दूसरी और एक ही रोग से पीड़ित रोगियों को अलग अलग होम्योपैथिक दवाओं की ज़रूरत पड़ सकती है. इसे इस प्रकार समझें कि बेलाडोना नाम की होम्योपैथिक दवा बुखार में भी काम आती है एवं दूसरी तरफ गुर्दे की पथरी के पेशाब की नली (Ureter) में फंसने पर पेट में होने वाले भयंकर दर्द में भी काम आती है, इस प्रकार एक ही होम्योपैथिक दवा शरीर के भिन्न भिन्न अंगों एवं  ऊतकों को प्रभावित करने की क्षमता रखती है.
     इसी प्रकार मौसम के बदलाव के समय पर होने वाले वायरल फीवर के चार रोगियों को चार अलग अलग दवाओं की जरूरत हो सकती है, एक ही परिवार में खांसी से पीड़ित दो बच्चे जरूरी नहीं कि ए़क ही दवा से ठीक हों, उनके लक्षणों में भिन्नता होने से वे अलग अलग दवाओं से ही ठीक हो सकतें हैं.

9. बहुत बार रोगी ए़क से अधिक रोगों से पीड़ित होते हैं. वे किसी ए़क रोग का ईलाज एलोपैथी या अन्य किसी विधि से करवा रहे होते हैं और उनका रोग पूरी तरह नियंत्रण में भी होता है, परन्तु वे अपनी किसी दूसरी समस्या के लिए होम्योपैथ के पास आते हैं, और अपने पहले वाले रोग और उसके चल रहे ईलाज के बारे में बताना ज़रुरी नहीं समझते और ज़रुरी नहीं कि होम्योपैथ भी आपसे आपके उस रोग के बारे में पूछ पाये, लेकिन मरीज को चाहिए कि वो अपने सभी वर्तमान में चल रही तकलीफों के बारे में विस्तार से बताये अन्यथा बहुत सम्भावना है कि आपको सही दवा देने से होम्योपैथ चूक जाये.
    होम्योपैथी में, सभी रोग, चाहे वे कितने भी अलग अलग अंगों और तंत्रों के हों, मूलतः रोगी के प्रतिरोधक तंत्र को प्रभावित करते हैं, और होम्योपैथिक दवायें प्रतिरोधक तंत्र को प्राक्रतिक रूप से सशक्त बना कर ही रोगी को ठीक करती हैं. होम्योपैथिक दवाईयाँ शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को प्राक्रतिक रूप से बढाती हैं जिससे शरीर स्वयं बीमारियों से मुक्त होने में सक्षम हो जाता है


Mar 11, 2012

High Potencies in Cases of Cholera - By P C Majumdar



This clinical case is published in THE MEDICAL ADVANCE, A HOMOEOPATHIC MAGZINE, Vol XXXIII, Chicago, July 1, 1895
No 1.

EXPERIENCE OF HIGH POTENCY IN CHOLERA

P. C. MAJUMDAR, M. D., CALCUTTA, INDIA



In a recent outbreak of cholera in the city of Calcutta, we had the greatest satisfaction in observing the efficacy of high potencies. In earlier years of our practice we generally used to prescribe very low dilutions. In the last epidemic about the beginning of February, 1895, which lasted till the end of
April, we often had recourse to high potencies successfully and sometimes after failing with the lower ones. Among others, I cite two cases here to show what I contend to be true.


CASE I. M. N. Degs, age about five years, had an
attack of cholera on the 18th of March, 1895. An old school physician was called who prescribed some astringent and stimulant medicines for a whole day without any effect. The case went on worse and I was sent for the next morning. Violent purging and vomiting of rice water stuff, cramps in the extremities, cold perspiration, especially on the head, considerable thirst and restlessness, pulse thready. Prescribed Veratrum album 12X after each stool. Three hours after I visited the patient again. Purging stopped but a good deal of retching, thirst increased but small quantity at a time, pulse scarcely perceptible, burning and restlessness. Arsenic 30 every hour.
Reported the same in the evening, symptoms unabated.
I was thinking of changing the medicine but the indications were clear for arsenic, so I determined trying a high potency. Arsenic CM, one dose every two hours. In my next visit I found the patient better in every respect, after taking only two doses of the remedy. I stopped medicine and the patient was convalescent.


CASE II. A male child of two years old came under my treatment on the 29th of March, 1895, for purging and vomiting. The child had been suffering from fever and congestion  of liver for which purgatives was ordered by a county physician. This brought on the attack. I found watery stools with flakes, restlessness, intense pain in abdomen, cramps and thirst. Veratrum album 12X  was given. After a few hours, stools, became greenish, less in quantity and more consistent. Other
symptoms were less severe. Father of the patient reported to me all week.

On my visit next morning I observed pulse thready and frequent, head hot but the extremities cold and great restlessness. Aconite3X one dose every two hours. No improvement after four hours. Head very hot, hands and feet cold, eyes red and shining, thirst and restlessness increased, there was a tendency to sleepiness. I gave Belladonna 5X, one dose every
two hours. Called in great haste at noon, child in state of convulsions, could not swallow medicines. Belladonna 3X and afterwards 30 by inhalation. The patient was in imminent danger, eyes upturned, respiration impeded, eyes and face bright red, tonic spasms of the whole muscular system of the body. Opium, Hydrocyanic acid, Cicuta, Zincum, were
administered both internally and by inhalation without any effect. I was about to come out in despair when it struck me to try a high potency so Belladonna CM a few globules with difficulty placed on the tongue. In about half an hour the spasms abated, every other symptoms so much relieved that the child fell fast asleep. No other medicines given for this, but he
required some other remedy for diarrhoea and other symptoms that remained.
Complete cure was effected in a week.



Mar 5, 2012

A Case of Herpes Zoaster

Presented By 

Dr. R. S. Mann
Consultant Homeopath

14 January, 2012

A 31 yrs old male patient presented with red papular  eruptions on right dorsal region, shoulder, upper arm and bend of elbow. Pain as if bones are broken inside which started on evening of 12 January(2 days earlier) but he thought it is just a simple sprain and will resolve but this morning he seen few eruptions and came for consultation. Pains are increasing by moving the arm. Pains are severe.

Past History of Chicken Pox is found. Case is diagnosed as Herpes Zoaster.

 © Dr.R.S.Mann 2012



 © Dr.R.S.Mann 2012

© Dr.R.S.Mann 2012


Repertorization:  Radar Software


EXTREMITIES - PAIN - Upper arm
SKIN - ERUPTIONS - herpes zoster
SKIN - ERUPTIONS - papular
SKIN - ERUPTIONS - red
GENERALS - PAIN - broken; as if - Bones
GENERALS - SIDE – right


Out of 6 rubrics taken for case:-

Sil 6/9, Caust 6/8, Chammo 6/7, Merc Sol 5/12, Rhus Tox 5/10, Sulph 5/10.

Prescription:

Silicea 30  3 Doses prescribed 6 hourly.




17 January, 2012

© Dr.R.S.Mann 2012

© Dr.R.S.Mann 2012


Papular eruptions now converted in Red vesicles with red areola. Pain like fractured bone is mild, no itching, no burning, no fever.

Prescription:

S L  for a day.



18 January, 2012

© Dr.R.S.Mann 2012

© Dr.R.S.Mann 2012

© Dr.R.S.Mann 2012


Vesicles started to become white, grey and sinking. Areola is red. Pain, like bone is fractured, increased again. Sleeplessness due to pain and sometimes sleep disturbed by pain. Pain increases by motion of arm and better by rest. Arm is trembling. Burning started over all the effected area. Eruptions, on dorsal region of back, are crusting now.

Repertorization:

BACK - PAIN - Dorsal region
BACK - PAIN - Dorsal region - Scapulae
EXTREMITIES - ERUPTIONS - Upper limbs - vesicles
EXTREMITIES - PAIN - Upper arm
EXTREMITIES - TREMBLING - Upper limbs
SLEEP - DISTURBED - pains, by
SLEEP - SLEEPLESSNESS - pains, from
SKIN - BURNING
SKIN - ERUPTIONS - herpes zoster
SKIN - ERUPTIONS - itching
SKIN - ERUPTIONS - vesicular - Areola - red
GENERALS - MOTION - agg.
GENERALS - PAIN - broken; as if - Bones
GENERALS - REST - amel.
GENERALS - SIDE – right

15 rubrics are taken for the case. 



Sil 15/31, Rhust t 14/30, Sulph 14/27, Merc Sol 13/30, Ars 13/25, Caust 13/19,
Nat carb 13/16.

Prescription:

Silicea 30   3 Doses prescribed 6 hourly.

S L for 3 days.



21 January 2012

Pains, burning, trembling all are reduced. No fever. Sleep is better now. Eruptions started drying up. Crust formation everywhere.
© Dr.R.S.Mann 2012

© Dr.R.S.Mann 2012


Prescription :

S L for 5 days.



26 January 2012

Improving. No pain, burning, trembling, fever. Mild itching.

 © Dr.R.S.Mann 2012

© Dr.R.S.Mann 2012

© Dr.R.S.Mann 2012

© Dr.R.S.Mann 2012


Prescription:

S L for 5 days.



4 February 2012
© Dr.R.S.Mann 2012

© Dr.R.S.Mann 2012

© Dr.R.S.Mann 2012



No burning, itching. Crusts are clear. No prescription.


Conclusion: 


 Herpes Zoaster or Shingles is easily manageable by homeopathic treatment. Homeopathic prescription in these infections help to pass the whole cycle of herpes zoaster without or least associated sign and symptoms like pain, burning, itching, tingling, fever, malaise, headache and keep away the complications.




Mar 3, 2012

A Case of Nodular Acne with scaring on Face


Presented By

Dr. R. S. Mann
Consultant Homeopath
   B.H.M.S. (Jaipur)


A 25 yr old male presented with acne for more then 3 years. He has recurrent acnes, since last 3 years not a single day he passed without one or two acne at a time. Acne resolved with discharge of pus mixed with blood. Acnes leave scaring on face. Mild pain is present on pressing acne. While he has acne on all over the year but in summers it gets much worse.

Patient has itching on face, not on acne, but on cicatrix after healing of earlier acne.

Patient has one more complaint of vertigo while standing. This complaint is started later after acne and present off and on.

Constitutionally patient is lean and thin. 

On 15/12/2011:

© Dr.R.S.Mann 2011



© Dr.R.S.Mann 2011





On Repertorization:

VERTIGO - STANDING, while
FACE - ERUPTIONS - acne
SKIN - CICATRICES
SKIN - CICATRICES - itching
GENERALS - LEAN people
GENERALS - SEASONS - summer; in - agg.

Medicines:

6 rubrics are selected for repertorization.

Acid Fluor 6/12, Phos 5/10, Lach 5/9, Sil 5/9, Iod 5/8, Nat Mur 5/8, Graph 5/7

On Small rubrics and Small Medicines:  Acid Fluor, Iod, Sil, Graph

Vithoulkas Expert System: Acid Fluor, Iod, Nux Mos, Graph


Prescription:

Acid Fluor 30 CH, 3 Doses 6 hourly.
S.L. for 7 days.


On 23/12/2011: 

Patient is better.
Acne reduced in size.
Itching on cicatrix reduced.
Vertigo improved.

© Dr.R.S.Mann 2012



© Dr.R.S.Mann 2012




Prescription:

S.L. for 7 days.


On 2/1/2012:

2 new acne started to erupt.

Older acne is improving.

Prescription:

Acid Fluor 200 CH, 1 Dose
S. L. for 7 days.


On 9/1/2012: 

Two new eruptions which seem starting on last consultation, they disappear after last prescription and do not proceed further.

Itching on cicatrix completely improved.

Nodular acne improved.

No vertigo.

© Dr.R.S.Mann 2012



Prescription:

S. L. for 14 days.

On 23/1/2012: 

© Dr.R.S.Mann 2012



No new eruptions, old one is already cured. First time since last three years that he has no eruption or acne on face.


No itching.

No vertigo.

His complexion improved.

Scars reduced.


Prescription:

S. L. for 7 days.

And consulted to stop treatment after it.