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Jul 13, 2018

डेंगी बुखार


डेंगी (Dengue) बुखार 


मानसून की शुरुआत के साथ ही डेंगी (Dengue) बुखार का खतरा सिर पर मंडराने लगता है. दुनिया के 110 से भी ज्यादा देशों में प्रतिवर्ष लाखों लोग इस इंफेक्शन का शिकार होते हैं, व प्रत्येक वर्ष पूरे विश्व में 10,000 से 20,000 मरीजों की मृत्यु डेंगी बुखार की वजह से होती है.

डेंगी एक वायरस जनित बुखार है, इस वायरस की 4 प्रजातियाँ मनुष्य में इंफेक्शन करती हैं. एक बार इंफेक्शन होने पर उस प्रजाति के डेंगी वायरस के प्रति जीवन भर के लिये प्रतिरोधी क्षमता पैदा हो जाती है, यानी डेंगी वायरस की वह प्रजाति अब दोबारा उसी रोगी को बीमार नहीं कर सकती, परन्तु अन्य तीन प्रजातियाँ जरूर इंफेक्शन कर सकती हैं.

डेंगी वायरस, एडीज मच्छर के काटने पर रोगी के शरीर में पहुंचता है. यह मच्छर अक्सर दिन के समय व शरीर के निचले हिस्सों पर काटता है. यदि इकट्ठा हुए पानी का ठीक निस्तारण किया जाए, व बारिश के मौसम में शरीर को पूरा ढकने वाले कपड़े पहनें जायें, तो एडीज मच्छर से बचाव किया जा सकता है.

एडीज मच्छर द्वारा रोगी को काटने व डेंगी वायरस के शरीर में पहुँचने के 3 से 14 दिन बाद ही डेंगी बुखार के लक्षण शुरू होते हैं.

डेंगी के लक्षण:-

तेज बुखार, लगातार बना रहने वाला सिरदर्द, उल्टी, मांसपेशियों व जोड़ों में तेज दर्द व त्वचा (skin) पर निकल आने वाले विशेष दाने.




खून जाँच में प्लेटलेट्स कोशिकाओं की सँख्या में कमी आते जाना व डेंगी के लिये होने वाले खून की जाँच से बीमारी की पहचान हो जाती है.

 डेंगी बुखार के अधिकतर रोगी सामान्य दवाओं व इलाज से ठीक हो जाते हैं. जरूरी नहीं है कि प्रत्येक रोगी में रोग जटिल स्तर (complications) तक पहुँचेगा.


किसी भी दवा का इस्तेमाल चिकित्सक की राय से ही करें. बुखार को कम करने के लिये सिर्फ पैरासिटामोल (एसीटएमिनोफेन) का इस्तेमाल करें.   एस्प्रिन, ब्रूफेन, नप्रोक्सिन नामक दवाओं का इस्तेमाल कतई न करें, डेंगी (Dengue) के इंफेक्शन के दौरान ये दवाएं, शरीर के भीतर रक्तस्राव करवा सकती हैं.

जटिलता के लक्षण:- 

ब्लड प्रेशर का बहुत कम हो जाना. 

प्लेटलेट्स की सँख्या 20000 से भी नीचे गिर जाना.

शरीर के भीतर रक्त स्राव.

प्लाज्मा लीक होना.

शॉक में चले जाना आदि.

लेकिन 80 प्रतिशत रोगियों में डेंगी आम वायरल बुखार की तरह गुजर जाता है, 5 प्रतिशत रोगियों में गम्भीर लक्षणों के साथ आता है, इनमें से भी कुछ ही मरीजों में जटिलता के स्तर तक पहुंचता है

 डेंगी बुखार से रिकवरी होते समय बेहद कमजोरी, अत्याधिक खुजली, हृदय गति का कम होना, व किसी- किसी रोगी में मिर्गी जैसे दौरे का आना एक सामान्य प्रक्रिया है, जिसे लेकर घबराने से बचना चाहिये


डेंगी के वार्निंग साईन क्या हैं?

   - लगातार बढ़ती जा रही उल्टियाँ

   - तेज होता जा रहा पेट दर्द

   - नाक- मुँह से खून आना, या त्वचा व म्यूकोसा के नीचे खून बहने से चकत्ते पड़ना

   - बेहद कमजोरी या बेहद बेचैनी

यदि रोगी में ये लक्षण हों, तो तुरंत अस्पताल में भर्ती करवाएं.

क्या-क्या करें?

किसी भी अन्य वायरल इंफेक्शन की तरह पानी व तरल पदार्थों का सेवन अधिक करें. 

आस- पास मच्छरों को न पनपने देने के लिये पानी के गड्ढों को भर दें.

पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें.

मच्छरों को भगाने वाली क्रीम आदि का इस्तेमाल करें.

बुखार आने पर घबरायें नहीं वरन सजगता से लें. 

सही जानकारी के साथ, डेंगी इंफेक्शन को आसानी से हराया जा सकता है.


डॉ वंदना पाटनी
डॉ रविंद्र सिंह मान

शिखर होम्योपैथिक क्लिनिक
कपिल काम्प्लैक्स, मुखानी
हल्द्वानी

Aug 1, 2017

शिखर होम्योपैथिक क्लिनिक, हल्द्वानी

शिखर होम्योपैथिक क्लिनिक
कपिल काम्प्लैक्स,
मुखानी, 
के डी रोड़
हल्द्वानी
जिला:- नैनीताल
उत्तराखंड


डॉ रविंद्र सिंह मान
बी एच एम एस(जयपुर)

डॉ वंदना पाटनी
बी एच एम एस(जयपुर)

Consult @9897271337


वर्तमान समय में होम्योपैथिक चिकित्सा, ऐलोपैथी के बाद इस्तेमाल की जा रही दूसरी सबसे बड़ी चिकित्सा पद्वति है. भारत जैसे विशाल आबादी वाले विकासशील देश में प्रतिदिन 10 फीसदी मरीज होम्योपैथिक चिकित्सकों से परामर्श लेते हैं. केंद्र व राज्य सरकारें भी बड़े राजकीय चिकित्सालयों से लेकर प्राथमिक चिकित्सा केंद्रों के स्तर तक होम्योपैथिक डिस्पैंसरियों के माध्यम से होम्योपैथिक चिकित्सा उपलब्ध करवा रही हैं.

होम्योपैथिक चिकित्सा विधि द्वारा सामान्य खाँसी, बुखार, मलेरिया, वायरल जैसी मौसमी बीमारियों के साथ- साथ ल्युकोडर्मा, सोरायसिस, कोलाइटिस, गंजापन, एक्जिमा, मानसिक रोगों, अनिद्रा, यौन रोगों जैसे बेहद पुराने, व लाईलाज रोगों का भी सफलता पूर्वक ईलाज संभव है.

नवजात बच्चों, गर्भवती महिलाओं, तथा बुजुर्ग मरीज़ों को भी किसी साईड-इफेक्ट के डर के बिना होम्योपैथिक दवायें दी जा सकती हैं.

शिखर होम्योपैथिक क्लिनिक की स्थापना 2003 में हुई. तभी से हम होम्योपैथिक चिकित्सा के उच्चतम मानदंडों का पालन करते हुऐ, लाखों मरीजों की सफल चिकित्सा करने में कामयाब हुये हैं. 

होम्योपैथिक चिकित्सा अन्य चिकित्सा पद्धतियों से दो मुख्य कारणों से भिन्न है. पहला तो यह कि, होम्योपैथी में चिकित्सा व दवा, रोग (disease) के डायग्नोसिस के आधार पर नहीं, बल्कि रोगी के विभिन्न शारीरिक, मानसिक व भावनात्मक लक्षणों के आधार पर दी जाती है. होम्योपैथी का मूल मंत्र सिर्फ रोग ठीक करने से भी बढ़कर, रोगी को पुनः स्वस्थ करना है.

दूसरा, अन्य सभी चिकित्सा पद्धतियों के विपरीत, होम्योपैथी न्यूनतम दवा की मात्रा, व कम से कम दवाओँ के इस्तेमाल के सिद्धांत पर विश्वास करती है.यही वजह है कि, होम्योपैथिक चिकित्सा बिना साईड इफ़ेक्ट वाली चिकित्सा पद्वति के रूप में प्रसिद्ध है.

किसी भी चिकित्सा पद्धति की मान्यता बढ़ने और अधिक इस्तेमाल शुरू हो जाने पर उसमें दोष आने लगते हैं. होम्योपैथिक चिकित्सा भी कोई अपवाद नहीं है. ऐलोपैथी की ही तरह होम्योपैथिक दवा कंपनियों ने भी विभिन्न काम्बिनेशन पेटन्ट्स बनाने प्रारम्भ कर दिये हैं. अलग- अलग रोगों के लिये कई- कई दवाओं को मिलाकर काम्बिनेशन तैयार किये जा रहे हैं, व अनेक होम्योपैथिक चिकित्सक भी इन पेटन्ट्स को खुल कर इस्तेमाल कर रहे हैं, जो कि होम्योपैथिक चिकित्सा के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है. रोगी के रूप में यदि आपको इसी प्रकार के काम्बिनेशन किसी होम्योपैथिक चिकित्सक द्वारा दिये जा रहे हैं, तो सावधान हो जाएं, क्योंकि इन काम्बिनेशन से आपको थोड़ी राहत जरूर मिलेगी लेकिन होम्योपैथी द्वारा बिना साईड इफेक्ट के जड़ से रोगों के ठीक हो जाने का आपका विश्वास शायद कायम न रह पाये. 


इस प्रकार के सभी काम्बिनेशन होम्योपैथिक दवाओं से जरूर बने हैं, लेकिन ये होम्योपैथिक चिकित्सा के सिद्धांतों का उल्लंघन करके बनाये गए हैं, इनके उपयोग से गम्भीर साईड इफेक्ट भी हो सकते हैं तथा फौरी राहत से ज्यादा आराम आप इन पेटन्ट्स से नहीं पाएंगे.